विकास दुबे मास्टरमाइंड 



एक सुबह सो कर उठे तो पता चला विकास दुबे पकड़ा गया ..
दूसरी सुबह पता चला विकास दुबे मारा गया ....अब वेब सीरीज आने का इंतेज़ार हैं ....लेकिन जो कहानी कानपुर पुलिस ने बताई है वो सावधान इंडिया और क्राइम पेट्रोल वाले भी अपनी स्टोरी में न ले....जो लोग 3 जुलाई से इस घटना को टी वी के माध्यम से देख रहे थे कि कैसे कानपुर पुलिस ने अपराधी विकास के साथियों को एनकाउन्टर में मार गिराया ...और यू पी पुलिस ने 5 राज्यों की पुलिस को अलर्ट कर दिया ...यूपी की सीमा पर चैकिंग ...लेकिन इन सब के बावजूद विकास कानपुर से निकल वहाँ पहुँचा जहाँ उसे जाना था...किसी को नहीं पता वो कैसे एमपी तक पहुंचा किन लोगों ने उसकी मदद की यहाँ तक पंहुचाने में ...और 2 जुलाई की रात किस ने उसकी मदद की कैसे की सब कुछ विकास दुबे के साथ चला गया ...कैसे बेगुनाह 8 पुलिस वालों को मार दिया .....क्या विकास को किसी का ख़ौफ नहीं था ....उसका डर उज्जैन में देखने मिला जिस तरह से विकास ने कहाँ ..मैं विकास दुबे हूँ कानपुर वाला... ये डर तब आया जब उसे पता चला जैसे उसके साथियों को मार दिया कही उसका भी एनकांउटर न हो जाए .....बहुत से लोग खुश हो रहे है कि ऐसे अपराधियों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए ....क्या वो लोग आज जो हुआ उसको भविष्य में देख पा रहे है ...आज जो हुआ वो कानून को ताक पर रखकर हुआ ...कब से प्रसाशन में बदले की भावना जागृत हो गई ...जब अदालत है तो फिर क्यों इस तरह से इस घटना को अंजाम देना पड़ा ...जब सच्चाई सबूत सब कुछ था तो क्या अदालत अपराधी विकास को फाँसी की सजा न दे पाती ....आज जिस संविधान ने हमें बोलने अपने विचार रखने का अधिकार दिया है आज उस संविधान को ताक पर रखकर ...एक हिटलर साही राज के पन्नपने की शुरुआत हुई हैं .....अगर विकास दुबे अदालत जाता तो कई सफेद कुर्ते दाग़दार होते,कई ख़ाकी वर्दी उतरती... आज भले ही उस अपराधी को मार दिया ...लेकिन उस व्यक्ति को किन लोगों ने वेखौफ़ बनाया ...किन लोगों ने उसे सह दी कि वो इतने सालों से अपनी अपराध की दुनिया मे राज कर रहा था ...वो सब उस एक आदमी के साथ चला गया ...और हमारे सिस्टम में कब से अपराधियों को पुलिस सजा देने लगी ..आगे से अपने सियासी कामों में भी ऐसी ही रणनीति अपनायी जाएगी तब आप कुछ नही कर पाएंगे ....जब एनकाउंटर के नाम पर कोई बेकसूर मारा जाएगा तब भी आपको चुप रहना पड़ेगा ....ये कहाँ का इंसाफ है बढ़ते अपराधियों और अपराधों को रोकने उनका एनकाउंटर कर दिया जाए ....
की उन अपराधियों की जड़ तक पहुँचना कहाँ से इनके पन्नपने की शुरुआत हुई ......हम तब तक चुप रहते है जब तक हमारे अपनों पर बात नहीं आती और जब अपनों पर बात आती है हम कुछ बोलने लायक नहीं रह जाते और न ही कुछ कर सकते हैं ....खैर जो हुआ बहुत गलत हुआ है...

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